*घाटी की गूंज न्यूज़ पोर्टल*
*संपादक : गिरधर गोपाल लूथरा*
*आलेख : एक भारत, श्रेष्ठ भारत*
हमारा देश नदियों, पर्वतों, भाषाओं और संस्कृतियों की घाटियों से बना है। हर घाटी की अपनी गूंज है—कहीं नर्मदा की लहरों का शोर, कहीं हिमालय की मौन साधना, कहीं राजस्थानी ढोल की थाप, तो कहीं तमिल के मंत्र। पर इन सब गूंजों को मिलाकर जो राग बनता है, वही है ‘भारत’।
*1. विविधता में एकता – भारत की आत्मा*
‘एक भारत’ कोई सरकारी नारा नहीं, हमारी सदियों की साधना है। सूरदास ने कहा था कि श्रीकृष्ण की मुरली का निनाद लोक-विमुग्ध कर देता है। वही मुरली आज भी हर बोली, हर रीति में बज रही है। पंजाब का भंगड़ा हो या केरल का कथकली, नागालैंड का हॉर्नबिल उत्सव हो या कच्छ का रणोत्सव—हर रंग मिलकर तिरंगे को और गहरा करता है।
श्रेष्ठ भारत तब बनेगा जब हम अपनी घाटियों की आवाज़ को दबाएँ नहीं, सुनें। जैसे नर्मदा घाटी की सहायक नदियों को अनदेखा करने से ‘उनाव’ की समस्या उठती है, वैसे ही किसी एक भाषा, एक प्रांत, एक विचार को अनदेखा करेंगे तो राष्ट्रीयता का जलस्तर असंतुलित हो जाएगा।
*2. गौरव का आधार – संस्कार और श्रम*
‘श्रेष्ठ भारत’ की नींव ईंट-पत्थर से नहीं, संस्कार से रखी जाती है। भारतेंदु युग के लेखकों ने याद दिलाया था कि जातीयता की भावना और श्रम का सम्मान ही असली विकास है। किसान खेत में, जवान सीमा पर, वैज्ञानिक प्रयोगशाला में और शिक्षक कक्षा में—जब हर भारतीय अपना धर्म निभाता है, तभी भारत श्रेष्ठ बनता है।
गोपाल का अर्थ है ‘गो’ यानी इंद्रियों का पालन करने वाला। श्रेष्ठ भारत का नागरिक भी वही है जो अपनी इंद्रियों, विचारों और कर्मों का संयम रखे। स्वच्छता, ईमानदारी, महिला-सम्मान और कानून का पालन—ये चार स्तंभ न हों तो ‘विकास’ का ढांचा मोरवी बांध की तरह भरभरा सकता है।
*3. एकता के सूत्र – संवाद और समावेश*
घाटी की गूंज तभी मधुर लगती है जब प्रतिध्वनि लौटकर आए। केंद्र और राज्य, शहर और गांव, पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी—इनके बीच संवाद का पुल चाहिए। डिजिटल इंडिया, एक राष्ट्र-एक राशन, एक राष्ट्र-एक टैक्स—ये सब प्रशासनिक एकता के कदम हैं। पर भावनात्मक एकता के लिए हमें गिरधर कवि की बात याद रखनी होगी: “बिना राई और नमक के सब बेखाद है”। राई-नमक है प्रेम, सम्मान और सहिष्णुता।
*4. श्रेष्ठता की कसौटी – अंतिम पंक्ति का व्यक्ति*
जब तक घाटी के सबसे दूर बसे गांव के बच्चे को किताब, बूढ़े को दवा और युवा को रोजगार न मिले, तब तक ‘श्रेष्ठ’ शब्द अधूरा है। एक भारत का मतलब है कि कश्मीर की घाटी का दर्द कन्याकुमारी में महसूस हो, और नॉर्थ-ईस्ट की उपलब्धि पर गुजरात ताली बजाए।
*निष्कर्ष*
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कोई मंज़िल नहीं, रोज़ की यात्रा है। इस यात्रा में हर नागरिक एक यात्री है और उसका कर्म ही टिकट। घाटी की गूंज कहती है—हम अलग-अलग सुर हो सकते हैं, पर राग एक ही है: भारत। और जब यह राग पूरी दुनिया सुनेगी, तो कहेगी—“यही है श्रेष्ठ भारत”।
— *गिरधर गोपाल लूथरा*
संपादक, घाटी की गूंज
_नोट: यह आलेख ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान की भावना से प्रेरित संपादकीय विचार है।_

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