केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू 11 जुलाई को उत्तराखंड के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान किरेन रिजिजू देहरादून के परेड ग्राउंड में छठे ‘लोक संवर्धन पर्व’ का उद्घाटन करेंगे. लोक संवर्धन पर्व में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा. इसमें 150 प्रदर्शनी स्टॉल लगाये जाएंगे. जिनमें 40 प्रतिशत उत्तराखंड की पारंपरिक कला एवं शिल्प को समर्पित होंगे. यहां लोगों को लाइव शिल्प प्रदर्शन, उद्यमिता एवं डिजिटल मार्केटिंग सत्र, खरीदार-विक्रेता संवाद तथा प्रसिद्ध कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मिलेगा अवसर.
देहरादून में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड सरकार के सहयोग से 11 से 15 जुलाई, 2026 तक देहरादून के परेड ग्राउंड में लोक संवर्धन पर्व के छठे संस्करण का आयोजन किया जाएगा. पांच दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन शनिवार, 11 जुलाई, 2026 को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू करेंगे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय एवं उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे. यह महोत्सव 15 जुलाई, 2026 तक आम जनता के लिए निःशुल्क खुला रहेगा.
देहरादून में आयोजित होने वाला यह संस्करण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह पहली बार है जब लोक संवर्धन पर्व का आयोजन किसी राज्य सरकार के सहयोग से किया जा रहा है. उत्तराखंड, प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना के अंतर्गत इस प्रमुख आयोजन के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ साझेदारी करने वाला पहला राज्य बन गया है. वर्ष 2024 में शुरुआत के बाद से अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के सहयोग से लोक संवर्धन पर्व के पांच सफल संस्करण आयोजित किए हैं. जिनसे 550 से अधिक कारीगरों और पाक विशेषज्ञों को लाभ मिला है. यह महोत्सव विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों, पाक विशेषज्ञों एवं उद्यमियों को राष्ट्रीय स्तर पर बाजार, व्यापार विकास तथा पारंपरिक आजीविका को बढ़ावा देने का मंच प्रदान करता है.
लोक संवर्धन पर्व के छठे संस्करण में देशभर की पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा एवं विरासत शिल्प को प्रदर्शित करने वाले लगभग 150 स्टॉल लगाए जाएंगे. इनमें लगभग 40 प्रतिशत स्टॉल उत्तराखंड की समृद्ध कला एवं शिल्प पर आधारित होंगे. जिससे स्थानीय कारीगरों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का विशेष अवसर मिलेगा. शेष स्टॉलों में जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प, अजरख ब्लॉक प्रिंटिंग, लाख की चूड़ियां, लकड़ी की कलाकृतियां, पीतल शिल्प, टेराकोटा, बेंत एवं बांस उत्पाद, हथकरघा वस्त्र सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा. इसके अतिरिक्त 20 फूड स्टॉलों पर गढ़वाली, कुमाऊंनी, राजस्थानी, महाराष्ट्रीयन, लखनवी सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी आगंतुकों को मिलेगा.

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