उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर विकराल रूप दिखाया है. सोमवार रात से लेकर मंगलवार सुबह तक हुई भारी बारिश के बाद प्रदेश के अधिकांश पर्वतीय जिलों में भूस्खलन, सड़क धंसने, जलभराव और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है.
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) की मंगलवार सुबह 11:30 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 158 सड़कें बंद हैं. इनमें 6 राष्ट्रीय राजमार्ग, 19 राज्य राजमार्ग, 3 एमडीआर, 2 ओडीआर, 35 पीडब्ल्यूडी सड़कें और 92 पीएमजीएसवाई/ग्रामीण सड़कें शामिल हैं. सबसे अधिक प्रभावित देहरादून जिला है, जहां अकेले 35 सड़कें बंद हैं.
इसके अलावा इस मानसून सीजन में 1 अप्रैल 2026 से लेकर अभी तक प्राकृतिक आपदाओं में 28 लोगों की मौत हुई है. वहीं 30 लोग घायल, 26 बड़े और 768 छोटे पशुओं की मौत हुई है. वहीं 246 मकान आंशिक, 12 मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त, 4 मकान पूर्ण रूप से ध्वस्त और एक गौशाला भी क्षतिग्रस्त हुई हैं.
राजधानी देहरादून में रातभर हुई बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई. देहरादून के नेहरू ग्राम, गणेश एन्क्लेव, नीलकंठ एन्क्लेव, गढ़वाली कॉलोनी, डालनवाला, रायपुर, प्रेमनगर और इंदुपुरी फार्म सहित कई क्षेत्रों में घरों और सड़कों में पानी भर गया. प्रशासन को जल निकासी के लिए तत्काल टीमें लगानी पड़ीं. वहीं सोमवार रात टोंस नदी में एक युवक के बह जाने की सूचना के बाद एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से उसकी तलाश में जुटे रहे.
भारी बारिश का असर सिर्फ मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा. मसूरी-चकराता मार्ग, देहरादून-मसूरी रोड, रायपुर-थानों मार्ग, मीनस-अटल मोटर मार्ग और कई संपर्क सड़कें मलबा आने या सड़क धंसने के कारण बाधित हो गईं. उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में जगह-जगह पहाड़ियों से बोल्डर और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है.

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