June 13, 2026

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बदरी-केदार में अब अलग से दर्शन कर सकेंगे दिव्यांग और बुजुर्ग

चरधाम यात्रा में लगातार आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. जिसे देखते हुए सरकार और मंदिर समिति लगातार व्यवस्थाओं को अपग्रेड करने में लगे हैं. इसी कड़ी में अब बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बड़ा फैसला लिया है. बीकेटीसी ने पहली बार दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुगम दर्शन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है.

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन नहीं करने पड़ेंगे. मंदिर समिति ने इसके लिए अलग सेएसओपी तैयार कर ली है. जिसे जल्द दोनों धामों में लागू किया जाएगा. ऐसा होने से बुजुर्ग और दिव्यंगजनों को लंबी लाइनों से नहीं गुजरना पड़ेगा.

चारधाम यात्रा सीजन में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. भीड़ बढ़ने के साथ ही बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है. कई बार घंटों लाइन में खड़े रहने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी तबीयत भी बिगड़ जाती है. इसी समस्या को देखते हुए बीकेटीसी ने अलग दर्शन स्लॉट तय करने का फैसला लिया है.

समिति के अनुसार सुबह और शाम आधा-आधा घंटे का विशेष समय केवल दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित रहेगा. नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को पहले मंदिर समिति के काउंटर पर पंजीकरण कराना होगा. 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रद्धालुओं को आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा. दिव्यांग श्रद्धालुओं को प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना पड़ेगा. सत्यापन के बाद उन्हें विशेष दर्शन पास जारी किया जाएगा. जिसके माध्यम से वे निर्धारित समय में बिना लंबी कतार के दर्शन कर सकेंगे.

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया यह पहल श्रद्धालुओं की सुविधा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए की गई है. उन्होंने कहा कि धामों में आने वाले बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को अब आम श्रद्धालुओं की तरह घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा. समिति का प्रयास है कि यात्रा को अधिक सुगम सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए. चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटी हुई है. माना जा रहा है कि बीकेटीसी की यह नई पहल आने वाले समय में तीर्थ प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी और हजारों श्रद्धालुओं को सीधा लाभ मिलेगा.